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BHARAT MERA PARICHAY

This poem is written by Vishakha Mishra, Sunbeam School, Mau.


मैं था भारत, मैं हूँ भारत, भारत - भारत मेरा परिचय


मैं नवल सृष्टि का सृजन गान,गिरिराज खड़ा इसका प्रमाण

गंगा की निर्मल सुधा राशि में, बहता मेरा मनः प्राण

मेरे चरणों में सागर है, मेरे सर पर विस्तृत वितान

मेरे ही अन्तस्थल में तो, है छुपा हुआ हर दिव्य ज्ञान

यदि मैंने सब कुछ त्याग दिया तो तुम करते हो क्यूँ संचय

मैं था भारत, मैं हूँ भारत, भारत - भारत मेरा परिचय


मैं मनु सतरूपा का संयोग, मैं आदिपुरुष का हूँ प्रयोग

मैं बोधिवृक्ष की सघन छाँव, मैं ही ऋषियों का ज्ञानयोग

मैं राम सिया का हूँ संगम, मैंने देखा उनका वियोग

मैं ही केवट का हठी विनय, मैं ही सबरी का बेर भोग


मैं विश्व रचयिता की संतति, इसमें तुमको कैसा संशय

मैं था भारत, मैं हूँ भारत, भारत - भारत मेरा परिचय


मैं कुरुक्षेत्र का हाहाकार, मैं अर्जुन धनुहा की टंकार

मैं चक्रव्यूह का भेद मंत्र, मैं ही जीवन का मोक्ष द्वार

मैं विवश द्रौपदी की पीड़ा, मैं सभा मध्य में पट प्रसार

मैं ही कुंती की व्यथा कथा, मैं कालचक्र का कथाकार


मैं विजय सारथी सदा रहा फिर तुम करते हो क्यूँ नित भय

मैं था भारत, मैं हूँ भारत, भारत - भारत मेरा परिचय


मैं महामृत्युंजय का नर्तन, मैं वसुधा पर नंदन कानन

मैं रौद्र रूप रणचण्डी का, मैं युगों - युगों का परिवर्तन

मैं सिंहगर्जना नरसिंहम, मैं ही वसुधा का आभूषण

मेरे वक्षस्थल पर खेले, श्री रामचन्द्र, औ मधुसूदन


उत्थान मार्ग पर चलना ही है सदा रहा मेरा आशय

मैं था भारत, मैं हूँ भारत, भारत - भारत मेरा परिचय

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