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MY HOME

The poem on home is written by Angel from Jammu, and the model in the picture was made by Krishnav from Jammu.

MY HOME (ENGLISH)


But one I know is far more sweet

Where tiny smudges on the wall

Tell of fingers dear and small.

Where toys are sometimes strewn about

And doors are banging in and out.

Where little children play and sing,

And laughter's often heard to ring...

The home I love is filled with noise

Of happy little girls and boys!


MERA GHAR (HINDI)


सर्दी, गर्मी और वर्षा से,

हमको यही बचाता है।

रक्षा और सुरक्षा देता,

अपना घर कहलाता है।

लकड़ी, मिट्‍टी, खपरे गारा,

कच्चे घर के साथी हैं।

लोहा, रेत, सीमेंट, ईंट, सब

पक्के घर बनवाते हैं।

खुली खिड़कियाँ, बड़े द्वार हैं,

पूरब-पश्चिम, हवा बहे।

घर के ऊपर चिमनी देखो,

काला-काला धुआ उड़े।

सूरज मेरे घर आँगन में,

फेरा रोज लगाता है।

मेरे घर का गंदा पानी,

कहीं-नहीं रुक पाता है।

वातावारण साफ सुथरा है,

हरे-पेड़ झूमा करते।

मेरे पापा की मेहनत यह,

मेरी मम्मी के सपने।

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