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SAPNO KA BHARAT

The poem is written by Spriha Singh, Sunbeam School, Jaunpur.

The sketch is made by Aditi Gupta, Sunbeam School, Mau.

मुगलों ने कहा हिंदुस्तान इसे

पुराणों नें दिया आर्यव्रत नाम जिसे

चाहे कह लो भारत या हिंद

आज तो गया था यह जित

पर क्या यह सच में जिता है

१५ अगस्त, २६ जनवरी, ईद दीपावली हम सब त्यौहार मानते है,

पर उस माँ का क्या जिसका बेटा सरहद पर मरने को खडा है।

हम बच्चे के पैदा होने पर मीठाईयाँ बांटते है,

पर उस माँ की बेटी का क्या जिसे पैदा होने से पहले ही मार दिया जाता है।

हम टिफिन में रोटी-सब्जि मिलने पर चिल्लाते है,

पर उस गरीब का क्या जो भूखा ही सो जाता है।

हम नये कपड़े ना मिलने पर दुःखी हो जाते हैं,

पर उस बेसहारा का क्या जो बिना कपड़े रात भर ठिठुरता रहता है।

हम कहने को तो आज़ाद हो गए हैं,

पर उस लड़की का क्या जो काम करने भी बाहर नहीं जा पाती।

कहने को तो हम सब एक बराबर है,

पर फिर क्यों दहेज ना मिलने पर शादी तोड़ने की धमकी लड़की के परिवार को दी जाती है।

ज़रा एक बार फिर सोच लेना

ज़रा एक बार फिर सोच लेना

क्या हम सब आज़ाद और सामान है,

कहीं अमीरी है तो कहीं गरीबी

कहीं खाने की बरबादी है तो कहीं भूख की महामारी

कहीं स्कूल ना जाने का बहाना तो कहीं स्कूल जाने के लिए पैसे नहीं

साथ होकर भी हम साथ नहीं

फिर भी कह लाने को तो हम सब हिंदुस्ताननी सही।

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